पुरुषों पर लगने वाले रेप और सेक्शुअल हैरसमेंट के हर आरोप सच साबित हों ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार आरोपों की सच्चाई जाने बिना ही पुरुषों को दोषी मान लिया जाता है जिससे उनकी इज्जत को भी काफी धक्का पहुंचता है।
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